भगत सिंह का इतिहास संपूर्ण जानकारी history of bhagat singh
भगत सिंह (Bhagat Singh)
●भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर ज़िले में हुआ था। जो वर्तमान में पाकिस्तान में है।
●वर्ष 1919 में 12 साल की उम्र में भगत सिंह ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के स्थल का दौरा किया था जहाँ एक सार्वजनिक सभा के दौरान हज़ारों निहत्थे लोगों को मार दिया गया था।
●चौरी-चौरा घटना के कारण महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन समाप्त कर देने के कारण भगत सिंह का गांधी जी के अहिंसा दर्शन से मोह भंग हो गया।
●इसके बाद भगत सिंह ‘युवा क्रांतिकारी आंदोलन’ (Young Revolutionary Movement) में शामिल हो गए और भारत से ब्रिटिश सरकार को हिंसक तरीके से हटाने की वकालत करने लगे।
●वर्ष 1923 में भगत सिंह ने लाहौर के ‘नेशनल कॉलेज’ में दाखिला लिया जहाँ उन्होंने नाट्य समाज की तरह पाठ्येतर गतिविधियों (Extra-curricular Activities) में भी भाग लिया।
●भगत सिंह, करतार सिंह सराभा को अपना आदर्श मानते थे। जो गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य थे।
●भगत सिंह अराजकतावाद (Anarchism) एवं साम्यवाद (Communism) के प्रति आकर्षित थे। वह मिखाइल बकुनिन (Mikhail Bakunin) की शिक्षाओं के एक उत्साही पाठक थे और कार्ल मार्क्स, व्लादिमीर लेनिन और लियोन ट्रॉट्स्की (Leon Trotsky) को भी पढ़ते थे।
●ज्युसेपे मैज़िनी (Giuseppe Mazzini) के ‘युवा इटली आंदोलन’ (Young Italy Movement) से प्रेरित होकर उन्होंने मार्च, 1926 में भारतीय समाजवादी युवा संगठन ‘नौजवान भारत सभा’ (Naujawan Bharat Sabha) की स्थापना की।
●ज्युसेपे मैज़िनी इटली के राजनेता, पत्रकार, इटली के एकीकरण के लिये एक कार्यकर्ता एवं इतालवी क्रांतिकारी आंदोलन के प्रमुख थे।
●वे राजतंत्र के घोर विरोधी थे। उनके प्रयासों से इटली स्वतंत्र एवं एकीकृत हुआ।
●वीर सावरकर मैज़िनी को अपना आदर्श नायक और लाला लाजपत राय मैज़िनी को अपना राजनीतिक गुरू मानते थे। बाद में लाला लाजपत राय ने मैज़िनी की प्रसिद्ध रचना 'द ड्यूटीज़ ऑफ मैन' (The Duties of Man) का उर्दू में अनुवाद किया।
● भगत सिंह ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (Hindustan Republican Association) में भी शामिल हुए जिसके प्रमुख नेता चंद्रशेखर आज़ाद, राम प्रसाद बिस्मिल एवं शाहिद अशफाकल्लाह खान थे।
♂ देश में उचित ढंग से क्रांतिकारी आंदोलन का संचालन करने के उद्देश्य से अक्तूबर, 1924 में युवा क्रांतिकारियों ने कानपुर में एक सम्मेलन बुलाया तथा ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (Hindustan Republican Association) नामक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की। इसके संस्थापक शचींद्र नाथ सान्याल (अध्यक्ष), राम प्रसाद बिस्मिल, जोगेश चंद्र चटर्जी तथा चंद्रशेखर आज़ाद थे।
♂ वर्ष 1928 में चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्त्व में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ का नाम बदलकर ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (Hindustan Socialist Republican Association- HSRA) कर दिया गया जिसका उद्देश्य भारत में एक समाजवादी, गणतंत्रवादी राज्य की स्थापना करना था।
●साइमन कमीशन के विरोध के समय लाला लाजपत राय पर लाठियों का प्रहार करने वाले सहायक पुलिस अधीक्षक सांडर्स की 30 अक्तूबर, 1928 को भगत सिंह, चंद्र शेखर आज़ाद तथा राजगुरु द्वारा की गई हत्या इस संगठन (HSRA) की पहली क्रांतिकारी गतिविधि थी।
●HSRA के दो सदस्यों भगत सिंह तथा बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली में केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका, दोनों को गिरफ्तार कर केंद्रीय असेंबली बम कांड के अंतर्गत मुकदमा चलाया गया। बाद में इस संगठन के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार कर कुल 16 क्रांतिकारियों के ऊपर लाहौर षड्यंत्र कांड के अंतर्गत मुकदमा चलाया गया।
●भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा दी गई। 23 मार्च, 1931 को इन तीनों को फांसी दे दी गई।
●चोरी-छिपे उनका अंतिम संस्कार पंजाब प्रांत के फिरोजपुर ज़िले में सतलज नदी के तट पर किया गया जहाँ वर्तमान में शहीद भगत सिंह स्मारक स्थित है।
● ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का पहली बार नारे के रूप में प्रयोग भगत सिंह ने किया था। भगत सिंह ने ही इस नारे को चर्चित बनाया था।
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